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कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने उठाया श्रम अधिनियम उल्लंघन का सवाल
बिलासपुर, 17 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने करगीरोड कोटा स्थित पार्टील रेल इंफ्रास्ट्रक्चर स्लीपर फैक्ट्री में मजदूरों के शोषण का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन देवांगन से प्रश्न किया कि क्या इस फैक्ट्री में श्रम अधिनियम का पालन किया जा रहा है? क्या श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, ईपीएफ और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं?
मजदूरों को नहीं मिल रहे कानूनी अधिकार
विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में आरोप लगाया कि इस फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है, और उन्हें ईपीएफ जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुल कितने श्रमिक नियमित तौर पर कार्यरत हैं और कितने ठेकेदारी के अधीन काम कर रहे हैं।
अवैध खनन और पर्यावरण प्रदूषण का आरोप
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री द्वारा कोटा के पहाड़ों को काटकर गिट्टी के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इससे संबंधित रॉयल्टी सरकार को नहीं मिल रही। इसके अलावा, रेत का अवैध भंडारण भी किया गया है, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड का उपयोग आसपास के गांवों के विकास के लिए किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन को जानकारी दी कि कुछ समय पहले एक मजदूर फैक्ट्री में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, लेकिन श्रम विभाग को सूचना दिए बिना ही उसे नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि कोई मजदूर कम वेतन या असुरक्षित कार्यस्थल को लेकर शिकायत करता है, तो उसे ठेकेदार नौकरी से बाहर कर देता है।
मंत्री ने जांच का दिया आश्वासन
इस पर श्रम मंत्री लखन देवांगन ने जवाब दिया कि 2023 से अब तक इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीर मानते हुए उन्होंने कहा कि संबंधित जिला कलेक्टर के माध्यम से जांच करवाई जाएगी।
विधायक ने उद्योग विभाग पर भी उठाए सवाल

विधायक अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उद्योग विभाग की संरक्षण नीति के चलते यह फैक्ट्री श्रम एवं कारखाना अधिनियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। उन्होंने मंत्री से मांग की कि इन अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या सरकार मजदूरों को न्याय दिला पाएगी?
इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में काफी बहस हुई और अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए उचित कार्रवाई करेगी या यह मुद्दा सिर्फ बहस तक ही सीमित रह जाएगा।
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